Emerging Social and Cultural Trends in Arranged Marriage Tradition in Modern India
आधुनिक भारत में व्यवस्थित विवाह परंपरा में उभरते सामाजिक और सांस्कृतिक रुझान
DOI:
https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n7.005Abstract
Abstract: व्यवस्थित विवाह ऐतिहासिक रूप से भारतीय सामाजिक ताने-बाने की एक मूलभूत धुरी रहा है, जिसकी जड़ें सांस्कृतिक लोकाचार, धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं में गहराई से अंतर्निहित हैं। तथापि, समकालीन दौर में वैश्वीकरण, तकनीकी नवाचारों, शिक्षा के प्रसार और क्रमिक रूप से परिवर्तित होती लैंगिक भूमिकाओं ने इस सामाजिक संस्था के पारंपरिक स्वरूप को व्यापक रूप से पुनर्गठित किया है। प्रस्तुत शोध पत्र आधुनिक भारत में व्यवस्थित विवाहों के प्रतिमानों में आते परिवर्तनों का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है; जिसका मुख्य ध्यान रूढ़िवादी पारंपरिक प्रथाओं से एक अधिक लचीले, संकर मॉडल (Hybrid Model) की ओर बढ़ते झुकाव पर केंद्रित है। इस अध्ययन के अंतर्गत यह पता लगाने का प्रयास किया गया है कि वैवाहिक वेबसाइट्स, महिलाओं का बढ़ता शैक्षिक स्तर, तीव्र शहरीकरण और बदलती सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता किस प्रकार जीवनसाथी के चयन, वैवाहिक अपेक्षाओं तथा पारिवारिक संरचनाओं को प्रभावित कर रही हैं। मौजूदा साहित्य की समीक्षा और गुणात्मक विश्लेषण (Qualitative Analysis) के माध्यम से, यह पत्र पूर्णतः माता-पिता द्वारा नियंत्रित विवाहों से 'अर्ध-व्यवस्थित' (Semi-arranged/ Love Cum Arranged Marriage) और 'पसंद-आधारित' (Choice-based) विवाहों में होते क्रमिक संक्रमण (Gradual Transition) को रेखांकित करता है, जिसमें पारंपरिक तत्वों का संरक्षण भी समाहित है। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि यद्यपि व्यवस्थित विवाह की प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण है, किंतु इसकी प्रकृति समकालीन आधुनिक मूल्यों के अनुकूल ढल रही है, जो भारतीय समाज के समक्ष नवीन चुनौतियाँ और अवसर दोनों उत्पन्न कर रही है।
Keywords: व्यवस्थित विवाह, भारत, आधुनिकीकरण, वैवाहिक वेबसाइट्स, अर्ध-व्यवस्थित विवाह, जीवनसाथी का चयन, गुणात्मक विश्लेषण, सामाजिक परिवर्तन, क्रमिक संक्रमण।
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